धरती पर महिलाओं और लड़कियों के प्रति हिंसा सर्वाधिक व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन है।

ऐसा सभी देशों में होता है, सभी जातियों में होता है, तथा इसके अनेक स्वरूप हैं। संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं के प्रति हिंसा को निम्नानुसार परिभाषित किया है, “लिंग आधारित हिंसा का कोई कार्य जिसके परिणामस्वरूप, या संभावित रूप से जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं को शारीरिक, यौन संबंधी, या मनोवैज्ञानिक क्षति या पीड़ा या दुख होता है, जिसमें इस प्रकार के कार्यों की धमकियां, अवपीड़न (जबरदस्ती) या मनमाने रूप से स्वतंत्रता से वंचना शामिल है, और फिर चाहे ऐसा सार्वजनिक या निजी जिंदगी में ही क्यों न हो।”1

इस हिंसा का पीड़ित महिला, उसके समीपवर्ती सभी लोगों, उसके समुदाय, तथा अंतत: उसके राष्ट्र के लिए भयावह परिणाम होते हैं। महिलाओं के प्रति हिंसा से वैश्विक संकटों का विस्तार होता है जैसे नशीली दवाओं और अल्कोहल का दुरूपयोग, आत्महत्या, शिशु मृत्यु दर, तथा निर्धनता। आर्थिक रूप से, लागत बहुत उच्च है: वैश्विक अर्थव्यवस्था का 5.5 प्रतिशत या प्रति वर्ष 4.7 ट्रिलियन डालर।2

समस्या के आकार तथा विस्तार के बावजूद, महिलाओं के प्रति हिंसा समाधानयोग्य समस्या है। शोध से यह पता लगा है कि जब राष्ट्रों द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के प्रति स्पष्ट, साक्ष्य-आधारित कदम उठाए जाते हैं, तो हिंसा की दर में भारी गिरावट आती है।

राष्ट्रों द्वारा इन कदमों को उठाया जाना हम किस प्रकार से आवश्यक बना सकते हैं? एक वैश्विक सम्मेलन।

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1. महिलाओं के प्रति हिंसा को दूर करने से संबंधित घोषणा, संयुक्त राष्ट्र संघ असेम्बली, 1993

2. संघर्ष और हिंसा आकलन पेपर, कोपेनहेगन जनगणना केन्द्र, 2014

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मैं हर जगह, हर महिला और लड़की के प्रति हर प्रकार की हिंसा से मुक्त जिंदगी का समर्थन करता/करती हूं।

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